
बातें जो कह देते तो आज़ाद हो जाते
बातें जो सुन लेते तो संवाद हो जाते
बातें जो जी लेते तो आबाद हो जाते
‘दिल की अनकही बातें’ उन तमाम जज़्बातों का ख़ज़ाना है, जो हमारे दिल की गहराइयों में दबी रह जाती हैं। उनके साथ-साथ, हमारे ज़मीर का एक हिस्सा भी कहीं खो जाता है। हम अधूरे रह जाते हैं—और चाहकर भी पूरी तरह जीवन नहीं जी पाते। सामाजिक मनोवैज्ञानिक और लाइफ़ कोच मनीष श्रीवास्तव ने पिछले दो दशकों में हज़ारों लोगों के अनुभवों, संघर्षों और आत्म-संवाद को सुना, समझा, और उन्हें कविताओं व किस्सों के माध्यम से संजोया है।
यह पुस्तक 12 अध्यायों में विभाजित है—हर अध्याय एक दरवाज़ा खोलता है, जो हमें यादों के गलियारों से होते हुए उस जीवन-मोड़ तक ले जाता है, जहाँ कुछ अधूरा छूट गया था। फिर यादें ताज़ा होती हैं, अनकही बातें साझा होती हैं, और घावों को एक आंतरिक शक्ति में परिवर्तित करने की राह मिल जाती है। अंदर आइए—शायद आपकी भी कोई अनकही बात, आज आपको आज़ाद करना चाहती हो।
“ये सिर्फ कविताएँ या किस्से नहीं हैं — ये वो पन्ने हैं जो हम सबने कभी तकिए के नीचे छुपा दिए थे। मनीष ने उन्हें खोजकर हमारे सामने रख दिया है — ईमानदारी, सादगी और बेहद अपनेपन के साथ”
— दिव्य प्रकाश दुबे, लेखक व कथाकार
“जो बातें हृदय से और सरलता से कही जाएँ, वही सीधे दिलों को छूती हैं। दिल की अनकही बातें बहुत सुंदर, बहुत सरल और बेहद निजी हैं। जब ऐसा निजी अनुभव दिल के अंतर्तम से साझा किया जाता है, तो वह सार्वभौमिक हो जाता है। मनीष की हर बात में हमें अपनी ही धड़कनें सुनाई देती हैं — जो हमें भीतर से आज़ाद होने के लिए प्रेरित करती हैं।”
— कुमुद मिश्रा, अभिनेता और रंगकर्मी
“दिल की अनकही बातें” आपके नज़दीकी bookstore और amazon पर उपलब्ध है।